Mon. Sep 14th, 2020

कक्षा 8 के लिए हिंदी कहानियाँ – ज्ञानवर्धक हिंदी कहानियाँ-

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आज हम कक्षा 8 के छात्रों के लिए हिंदी और अंग्रेजी में नैतिक के साथ 3 शक्तिशाली लघु हिंदी कहानियाँ पढ़ेंगे।

नीचे हमने कक्षा 8 के छात्रों के लिए आकर्षक तरीके से हिंदी कहानियाँ लिखी हैं।

1. सीखने का जुनून – नैतिक मूल्यों के साथ कक्षा 8 के लिए हिंदी कहानियां

हरिद्वार के एक संत जो अपनी वृद्धावस्था के कारण कुछ समय से चिंतित थे, उन्हें ज्ञान का भंडार कैसे सौंपना है जो उन्हें अपनी भावी पीढ़ी को सौंपना है।

इसके लिए, वह एक छात्र का चयन कर रहा था जो उसे लंबे समय तक सफल बना सके।

संत एक दिन अपने सभी शिष्यों के साथ लेकर कहीं जंगल में गए, जहाँ वे अपने शिष्यों को अपना ज्ञान दे सकते थे। संत चलते रहे, दुर्गम पहाड़ – नदियाँ पठार पर आ गईं, लेकिन संत नहीं रुके।

एक दिन दो दिनों के लिए हुआ, वह चार दिन और चार रातों तक लगातार चला।

इस बीच, रास्ते में, कुछ छात्रों ने शिक्षा लेने का विचार बदल दिया और वापस चले गए, कुछ छात्र दो दिनों तक चले और फिर लौट आए।

भूख और प्यास से परेशान कुछ छात्र अपने घरों को लौट गए और कुछ छात्र रास्ते में बेहोश हो गए।

लेकिन संत नहीं रुके
उन्होंने चलना जारी रखा और अंततः ऋषि एक झोपड़ी में पहुंचे।

अब उनके केवल दो शिष्य थे। वह उन शिक्षकों के साथ झोपड़ी में गया और खुशी से बोला! मैं तुम्हें अपने सारे व्यापार दे दूंगा और तुम्हें गेहूं से हीरे बनाने का अभ्यास करवाऊंगा।

यह कहते हुए उन्होंने अपने प्रत्येक शिष्य को एक-एक दाना गेहूं दिया और उनसे मंत्र का पाठ करने को कहा। एक शिष्य मंत्र पढ़ते समय बेहोश हो गया, जिसके कारण उसका मंत्र अधूरा रह गया और हीरा नहीं बन सका। लेकिन दूसरे शिष्य ने पूरे मंत्र पढ़े और उस गेहूं से एक हीरा बनाया, क्योंकि इस शिष्य में इच्छा शक्ति थी, इस विषय में ज्ञान लेने का जुनून, जिसके कारण शिष्य ने भूख, प्यास और थकान सब पर काबू पा लिया।

शिष्य अपने गुरु द्वारा दिए गए हर वचन, हर आज्ञा का पालन करता था। जिसके कारण वह अन्य शिष्यों से अलग था। संत ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सारा ज्ञान अपने शिष्य की झोली में डाल दिया।

क्योंकि यह शिष्य अपने गुरु के ज्ञान का सच्चा अधिकारी था।

निष्कर्ष –

ज्ञान प्राप्त करना सरल कार्य नहीं है, इसके लिए एकांत की भावना की आवश्यकता होती है।
व्यक्ति को अपने गुरु के लिए खुद को समर्पित करना चाहिए और लगन से ज्ञान अर्जित करना चाहिए। कबीर ने भी कहा है –
“यह घर प्रेम के महल, घर के ऊपर और नीचे का घर नहीं है, और फिर परिवार का घर है।

Moral of this short hindi story –

Acquiring knowledge is not a simple task, it requires a sense of solitude.
One should dedicate himself to his guru and earn knowledge diligently. Kabir has also said –
“This house is not a house of love, a house above and below the house, and then a family home.

इस कहानी का नैतिक

अपने जीवन में सही ज्ञान प्राप्त करने के लिए भक्ति महत्वपूर्ण है।

भक्ति किससे?

अपने इच्छित क्षेत्र में सही ज्ञान और शिक्षा प्राप्त करने के लिए आपको अपने गुरु के प्रति समर्पित होना चाहिए।
भक्ति भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अनावश्यक प्रश्नों के लिए कोई जगह नहीं है।
आप जो कुछ भी समझते हैं, वह केवल पिछले मिश्रण के बिना एक सही विश्वास पर आधारित है।

 

कक्षा 8 के लिए हिंदी कहानियाँ
कक्षा 8 के लिए हिंदी कहानियाँ

2. शिव का धनुष किसने तोड़ा (कक्षा 8 के लिए हिंदी कहानियाँ)

यह कहानी बहुत ही रोचक है।

एक बार कक्षा 7 के छात्र शरारत कर रहे थे। अचानक स्कूल में शिक्षा अधिकारी के आगमन की सूचना मिली। सभी शिक्षक अपनी-अपनी कक्षाओं में पहुँच गए। छात्रों ने शांत और होनहार छात्र की तरह किताब पढ़ना शुरू किया।

शिक्षा अधिकारी का आगमन जब कक्षा 7 बी के सभी छात्र पढ़ने में तल्लीन थे। शिक्षक सभी छात्रों को पढ़ा रहे थे। शिक्षा अधिकारी के आने पर पूरा वर्ग शांत भाव से खड़ा हो गया। अधिकारी के आदेश पर, सभी छात्र जगह पर बैठ गए। शिक्षा अधिकारी ने देखा कि छात्र इतने होनहार हैं। छात्रों से कुछ प्रश्न पूछे जाने चाहिए। उन्होंने एक सवाल उठाया, बच्चों

शिव का धनुष किसने तोड़ा?

पूरी कक्षा में, इस तरह की खामोशी चांदनी रात में घने जंगल में सन्नाटे की तरह है। शिक्षा अधिकारी ने एक बच्चे को उठाया और उसे जवाब देने का आग्रह किया। लड़के बस शरारत करते हुए बैठे थे, ताकि बच्चा समझ जाए कि हमारी शरारत पकड़ी गई है। एक छात्र ने एक धनुष तोड़ा होगा। इस पर बच्चे ने बालोचित रोते हुए कहा, सर, मैंने इस धनुष को नहीं तोड़ा और जोर  जोर से रोने लगा।

शिक्षा अधिकारी ने चुप कर दिया और उसे बैठ जाने के लिए कहा, कोई बात नहीं आप जाओ , तो उसने अन्य तीसरे छात्रों को खड़ा किया और सवाल का जवाब मांगा, लेकिन सभी छात्र उसी प्रक्रिया को दोहराते रहे, जो पहले छात्र ने दोहराया था। शिक्षा अधिकारी इस पर आश्चर्यचकित थे, कि कोई भी छात्र इतने आशान उत्तर को नहीं जानता है?

उन्होंने कक्षा में उपस्थित शिक्षक से वह प्रश्न पूछा। अब शिक्षक भी कक्षा में आ गए थे, उन्होंने भी उत्तर दिया, श्रीमान किसी बच्चे से टूट गया होगा। प्रिंसिपल साहब को देखें, वह इसे ठीक कर देंगे । अब शिक्षा अधिकारी को चक्कर आ गया और शिक्षा प्रणाली की स्थिति का पता चल गया।

कुछ समय के उपरांत

शिक्षा अधिकारी , प्रधानाचार्य कार्यालय में गए। कक्षा में पूछे गए प्रश्न – शिव का धनुष किसने तोड़ा ? प्रधानाचार्य जी से पूछा। इस प्रश्न के जवाब में प्रधानाचार्य ने उत्तर दिया श्रीमान किसी विद्यार्थी ने खेलते-खेलते तोड़ दिया होगा। कोई बात नहीं नया धनुष मंगवा देंगे।

अंततः शिक्षा अधिकारी को एक छोटे से प्रश्न का जवाब भी ना मिल सका। विद्यालय में मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता को वह जान चुके थे , वास्तविकता को पहचान चुके थे। इस पर शिक्षा अधिकारी नाराज होते हुए शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा के गुणवत्ता को सुधारने के लिए प्रधानाचार्य को आदेश देकर गए और निरंतर औचक निरीक्षण की बात भी कह गए।

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Moral of this short hindi story –

There are many lags in our education system. And that is what students are learning which is not good. By this hindi stories for class 8 students will get value of learning things themselves.

3. क्या जीत से खुशियां हासिल होती है

सिकंदर अपनी भारी-भरकम सेना को लेकर विश्व को जीतने निकला था। एक के बाद एक वह अनेक राज्यों को जीत चुका था , कितने ही देश अपने तलवार के नोक पर जीत चुका था। उसकी सेना भारी मात्रा में नरसंहार करती और अपने शक्ति का परिचय देती हुई पूरब के देशों की ओर शीघ्रता से बढ़ती हुई चली आ रही थी। सिंधु नदी के उस पार अफगान की सेनाओं ने भारी मात्रा में जमावड़ा लगाया हुआ था , शायद थके हुए थे कुछ दिन विश्राम करना चाहते थे।

सामने शस्य श्यामल भारत माता का आंचल जो प्रेम , सौहार्द और भक्ति से परिपूर्ण थी। जिसके कण-कण में देवताओं का वास था , विशाल हृदय से भारत माता दोनों बाहें फैलाकर अपने अतिथियों का स्वागत करती। सिंधु नदी के पार बैठा सिकंदर सेल्यूकस और उसके अन्य महान मंत्री गण भारत की ओर देखते हुए भारत की अद्वितीय छटा को निहार रहे थे।

वह जल्द ही भारत पर आक्रमण कर उसे अपना हिस्सा बनाना चाह रहे थे।

शायद वह इसका स्वप्न भी पूर्व में देखा करते थे आज वह जीत हासिल करने का समय आ गया था।

सामने ही एक पर्वत पर तपस्वी का आश्रम था। वह तपस्वी विश्व विख्यात था , सिकंदर ने उन तपस्वी से मिलने की इक्छा लेकर आश्रम में पहुंच गया । सिकंदर चुकी तपस्वी के बारे में पूर्व जानता था , उसने तपस्वी को अपने रोबदार अंदाज में कहा ! तपस्वी मैंने आपकी प्रशंसा सुनी हुई है आपको किसी बात की कोई कमी हो मुझसे कुछ आपको प्राप्त करना हो तो अवश्य कहिएगा।

तपस्वी ने शांत चित्त भाव से सिकंदर की संपूर्ण बातों को सुना और कहां , क्या तुम्हें युद्ध करना और जीतना पसंद है ? सिकंदर ने कहा हां ! मुझे युद्ध करना और जीतना बेहद पसंद है क्योंकि मैंने विश्व विजय का सपना देखा है और ऐसा करने से मुझे खुशी मिलती है।

तपस्वी ने कहा तुम्हें इससे खुशी नहीं मिलेगी , क्योंकि जब तुम संपूर्ण विश्व को जीत जाओगे तब तुम्हारे पास जितने के लिए और कुछ नहीं होगा , तब तुम खुश नहीं रह पाओगे। इसलिए तुम्हें यह कार्य छोड़ देना चाहिए और समाज विश्व बंधुत्व की भावना का विस्तार करो । सिकंदर सोच में पड़ गया आज से पूर्व किसी ने उससे जीत और जीत के बाद दुखी की बात को नहीं कही थी।

वह कुछ सोचते हुए वहां से अपने शिविर लौट आया।

जल्द ही सिकंदर और उसके सैनिकों का सामना पोरस तथा चंद्रगुप्त जैसे योद्धा और चाणक्य जैसे विद्वानों से हुआ। जिसमें उसे पराजय का सामना करना पड़ा और अपना विश्व विजय का सपना बीच में ही छोड़कर वापस प्राण लेकर भागने पड़े।

4. संत की खुशी का राज

राज्य से बाहर एक छोटे से टीले पर एक संत काफी दिनों से पेड़ की छांव में बैठा था। लोग उससे मिलने के लिए दूर-दूर से आया करते थे। कुछ ही समय हुआ होगा कि उसकी ख्याति दूर-दूर के राज्यों तक फैल गई थी। उस संत महात्मा से मिलने कितने ही राजा आ गए थे।

पड़ोसी राजा को भी मिलने का मन हुआ। राजा ने सोचा आखिर चलकर देखना चाहिए किस प्रकार का संत यहां ठहरा हुआ है और उसमें क्या विशेषता है। राजा ने यह विचार करते हुए संत से मिलने के लिए अपने मंत्रियों के साथ पहुंच गए।

राजा और संत के बीच काफी देर वार्तालाप हुई राजा संत की बातों से बेहद ही प्रभावित हुए और उन्हें अपने महल चलने के लिए आग्रह करने लगे।

संत तुरंत ही राजा के साथ चलने को राजी हो गए राजा आश्चर्यचकित रह गया। उसने यह कल्पना भी नहीं की थी कि संत तुरंत ही राजा के साथ चलने के लिए राजी हो जाएगा किंतु राजा ने स्वयं ही आग्रह किया था तो वह अपने बातों से कैसे पलट सकता था।

राजा संत को लेकर महल में आए

महल के शाही भोजन संत के सामने परोसे गए संत बेहद प्रसन्नता पूर्वक उन सभी व्यंजनों को इच्छा अनुसार खाते रहे। खाने के लिए उन्हें आज से पूर्व इतने व्यंजन नहीं मिले थे तो उन्हें बेहद ही आनंद आया। सोने के लिए उन्हें महल के मखमली बिस्तर मिले जिसे संत ने स्वीकार करते हुए महल में विश्राम किया।

इस प्रकार के सुख सुविधाओं में संत का जीवन चलने लगा 1 दिन राजा ने संत से अपने भीतर उठ रहे प्रश्नों का निवारण संत से चाहा। संत ने कहा स्पष्ट तुम अपने प्रश्न को मुझसे पूछ सकते हो

राजा कहता है महात्मा आप संत हैं मैंने सोचा था आप मेरे महल नहीं चलेंगे किंतु आप महल भी आ गए और शाही व्यंजन जो साधु संत नहीं करते वह भी आपने किया साधु-संत मखमली राजशी विस्तलों पर विश्राम नहीं करते वह भूमि पर ही अपने लिए बिस्तर लगाते हैं वह भी आपने नहीं किया क्या आप संत नहीं है।

संत के चेहरे पर प्रश्न सुनते ही एकाएक मुस्कान आ गई और अपने उत्तर के लिए राजा से कहा आपको मेरे साथ बाहर चलना होगा।

राजा को लेकर संत पूर्व दिशा की ओर चल दिए 15 मिनट चलने के उपरांत राजा ने संत से पूछा आप मेरे प्रश्नों के उत्तर कब देंगे ?

कुछ दूर और चलिए आपको आपके उत्तर मिल जाएंगे संत ने कहा।

आधा घंटा हो गया धूप के मारे राजा के प्राण निकलने को हो गए गला सूख गया पसीने से पूरा शरीर तरबतर हो गया राजा ने पुनः पूछा महाराज आप मेरे प्रश्नों के उत्तर कब देंगे मेरे मरने के बाद ?

संत ने कहा मैं संत हूं मुझे चाहे किसी प्रकार की परिस्थितियां हो किसी प्रकार का समय हो मुझे जीना आता है और तुम राजा हो तुम्हारे भीतर सुख-सुविधाओं का वास है तुम कठिन परिस्थितियों में नहीं जी सकते।

संत जहां भी रहते हैं वह खुश रहते हैं वह अपने परिस्थितियों से नहीं घबराते वह सदैव ईश्वर की आराधना में लगे रहते हैं इसलिए वह सदैव खुश रहते हैं। संत को यह फर्क नहीं रहता कि वह जंगल में अपना जीवन व्यतीत कर रहा है या महल में। यही संतों के सुख का राज है।

राजा को अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया था वह संत के बातों को भलीभांति जान गया था उसने संत से अपने मन में आए विचारों के लिए क्षमा मांगा और उन्हें अपने राज्य लाकर राज्य का पंडित राजपुरोहित बनाया

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